- महिला आरक्षण पर सरकार की नीयत संदिग्ध, विशेष सत्र बना जनधन की बर्बादी – मोहित उनियाल
पौड़ी: कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल ने राज्य सरकार द्वारा बुलाए गए एक दिन के विशेष सत्र को जनहित के बजाय “जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी” करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विशेष सत्र में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजना चाहिए था, जिसमें 2027 के उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों तथा 2029 के लोकसभा चुनावों में वर्तमान सीटों की संख्या के 33% पर महिलाओं को आरक्षण देने की स्पष्ट अनुशंसा होती।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार को यह भी प्रस्ताव भेजना चाहिए था कि यदि 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए केंद्र सरकार को पुनः संविधान संशोधन विधेयक लाना पड़े, तो उसे शीघ्र लाकर लागू किया जाए। कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा और उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र में इस मांग को मजबूती से उठाया, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज किया।
मोहित उनियाल ने बताया कि नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य द्वारा कांग्रेस विधानमंडल दल की ओर से 33% महिला आरक्षण लागू करने का संकल्प प्रस्तुत किया गया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उसकी केंद्र व राज्य सरकारें महिलाओं को वास्तविक आरक्षण देने के बजाय कानूनी पेचीदगियों में उलझाकर इसे टालना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून की अधिसूचना तीन साल बाद 16 अप्रैल 2026 को जारी की गई, जो सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करती है। यदि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती थी, तो इसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया गया? उनियाल ने 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में प्रस्तुत तीन विधेयकों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ये विधेयक पारित होते, तो लोकसभा में उत्तराखण्ड की हिस्सेदारी घट जाती और परिसीमन के आधार पर राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व भी कम हो सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि उस दिन उत्तराखण्ड के भाजपा सांसदों ने इसका विरोध क्यों नहीं किया।
उन्होंने कहा कि राज्य में महिला सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। अंकिता भंडारी प्रकरण सहित कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं को न केवल आरक्षण, बल्कि सुरक्षा और संरक्षण की भी आवश्यकता है। साथ ही, जंगली जानवरों के बढ़ते हमलों से महिलाओं और किसानों की सुरक्षा के लिए भी सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
अंत में मोहित उनियाल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों में 33% महिला आरक्षण लागू नहीं करती है, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।
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