डोईवाला। भाजपा नेता समर महंत ने लच्छीवाला टोल प्लाजा को वर्तमान स्थान से तत्काल किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थान पर टोल प्लाजा होने से डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ गढ़वाल और कुमाऊं से आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टोल प्लाजा के कारण जाम की समस्या
समर महंत ने कहा कि लच्छीवाला टोल प्लाजा ऐसी जगह स्थित है, जहां पहाड़ की ओर जाने वाले और कुछ किलोमीटर आगे ऋषिकेश की ओर मुड़ने वाले वाहनों को भी टोल देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।
उन्होंने टोल प्लाजा के आसपास लगातार लगने वाले जाम पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार, कई बार एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती हैं, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
अस्पताल जाने वाले मरीजों के लिए भी परेशानी
समर महंत ने कहा कि इस मार्ग से हिमालयन अस्पताल, एम्स ऋषिकेश, महंत इंद्रेश अस्पताल और दून अस्पताल जाने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों के वाहन भी गुजरते हैं। ऐसे में यातायात बाधित होने का सीधा असर मरीजों और आपातकालीन सेवाओं पर पड़ सकता है।
हाथी कॉरिडोर को लेकर उठाए सवाल
भाजपा नेता ने लच्छीवाला क्षेत्र में टोल प्लाजा की मौजूदगी को वन्यजीवों की सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय से हाथियों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा है और यहां अक्सर हाथी दिखाई देते हैं। इसके अलावा तेंदुए समेत अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी भी सामने आती रहती है।
उन्होंने मांग की कि टोल प्लाजा को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर वर्तमान क्षेत्र को हाथी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। उनका कहना है कि इसके लिए अनावश्यक पेड़ कटान के बजाय उपलब्ध स्थान का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया जा सकता है।
ढलान पर स्थित होने से दुर्घटना का खतरा
समर महंत ने टोल प्लाजा के मौजूदा स्थान की भौगोलिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टोल प्लाजा ढलान पर स्थित है, जहां भारी वाहनों और ट्रकों को कई बार ब्रेक संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार, इस कारण पूर्व में दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं और स्थान की सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन जरूरी है।
उन्होंने बताया कि डोईवाला नगर क्षेत्र टोल प्लाजा से करीब पांच किलोमीटर और देहरादून शहर लगभग 20 किलोमीटर दूर है। ऐसे में स्थानीय आवागमन को ध्यान में रखते हुए मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ता है यातायात दबाव
समर महंत ने कहा कि टोल प्लाजा के नजदीक मणिमाई मंदिर स्थित होने के कारण विशेष अवसरों, भंडारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे क्षेत्र में यातायात का दबाव और जाम की समस्या और गंभीर हो जाती है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ों से देहरादून आने वाले लोगों को चिकित्सा, सरकारी कार्य और अन्य जरूरी कामों के लिए इसी मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय लोगों से बार-बार टोल वसूली पर भी पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
सरकार और एनएचएआई से सर्वेक्षण की मांग
समर महंत ने उत्तराखंड सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से लच्छीवाला टोल प्लाजा का तत्काल सर्वेक्षण कराने और इसे उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कर इसे हाथी कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यातायात व्यवस्था सुचारु होने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही भी सुनिश्चित हो सके।
समर महंत ने कहा कि लच्छीवाला टोल प्लाजा की मौजूदा स्थिति स्थानीय जनता, आपातकालीन सेवाओं, यात्रियों और वन्यजीवों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने सरकार से जनहित और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस मामले में शीघ्र ठोस कदम उठाने की मांग की।
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