बागेश्वर। मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने और राहत-बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिले की आपदा तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने मानसून में हुई क्षति, राहत-बचाव कार्यों और विभागीय तैयारियों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को हर समय अलर्ट रहने के निर्देश दिए।
सड़क क्षतिग्रस्त होते ही शुरू हो कार्रवाई
मंत्री ने सड़क निर्माण एवं अनुरक्षण से जुड़े विभागों को निर्देश दिए कि सड़क क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि सड़कें बंद होने से राहत-बचाव कार्य भी प्रभावित होते हैं, इसलिए आवागमन जल्द सुचारु करना प्राथमिकता होनी चाहिए। एसडीआरएफ कार्यों और मलबा सफाई के एस्टिमेट तत्काल उपलब्ध कराने के साथ काफली-कमेडा सड़क के सुधारीकरण का एस्टिमेट तैयार करने के निर्देश दिए।
63 जेसीबी मशीनें संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात
प्रभारी आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रवीण गोस्वामी ने बताया कि जिले में आईआरएस की तर्ज पर एक जिला स्तरीय और चार तहसील स्तरीय टीमें गठित की गई हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए 63 जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं।
15 जून से अब तक आपदा घटनाओं में 6 लोग घायल हुए हैं। वहीं 5 भवनों को पूर्ण/तीक्ष्ण और 68 भवनों को आंशिक क्षति पहुंची है। प्रभावित परिवारों को 12.68 लाख रुपये की राहत राशि तथा 17,500 रुपये की अहेतुक सहायता दी गई है। जिले में अब तक 133 विभागीय परिसंपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी
मंत्री ने पंचायत भवनों, विद्यालयों, अस्पतालों और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों को हुई क्षति का विस्तृत विवरण तैयार करने के निर्देश दिए। अपर जिलाधिकारी एनएस नबियाल ने बताया कि राहत-बचाव के लिए विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है और संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जा रही है।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, विधायक पार्वती दास, कपकोट विधायक सुरेश गड़िया, पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा, मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो
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