पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों का आतंक—किसानों के लिए बन रहा गंभीर संकट, उपजाऊ भूमि छोड़ने पर मजबूर

पहाड़ी क्षेत्र। पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों का आतंक लगातार किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। विषम परिस्थितियों में खेती-बाड़ी कर गुजर-बसर करने वाले किसानों के सामने अपनी फसलों को जंगली जानवरों से बचाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।

किसानों के अनुसार, यह समस्या अब केवल कृषि संकट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप लेती जा रही है। बंदरों के भय से कई किसान अपनी उपजाऊ भूमि को बंजर छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।

अंकुरित पौधों से लेकर फलदार वृक्षों तक को नुकसान

बंदर केवल पकी हुई फसलों को ही नुकसान नहीं पहुंचा रहे, बल्कि अंकुरित पौधों, दालों, फलदार वृक्षों के फूलों और फलों को भी नष्ट कर रहे हैं। इससे किसानों की मेहनत और खेती पर किया गया खर्च प्रभावित हो रहा है।

मोटे अनाज और पारंपरिक खेती पर असर

मक्का, दालें, मंडुवा और झंगोरा जैसी फसलों को भी बंदरों से भारी नुकसान पहुंच रहा है। किसानों का कहना है कि बंदर फसलों के पकने से पहले ही उन्हें नष्ट कर देते हैं। इसके चलते कई लोग इन फसलों की बुआई करना छोड़ रहे हैं, जिससे पारंपरिक खेती पर भी असर पड़ रहा है।

ग्रामीण किसानों के अनुसार, फसलों को लगातार हो रहे नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है और खेती के प्रति उनका मनोबल भी टूट रहा है।

फसल नुकसान से पलायन की चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों द्वारा खेतों को उजाड़े जाने के कारण कई लोग गांव छोड़कर पलायन कर चुके हैं। किसानों की मेहनत से तैयार होने वाली फसल नष्ट हो जाने से उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है। लगातार नुकसान के चलते कृषि कार्य जारी रखना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।

बस्तियों में घुसकर लोगों पर हमले की शिकायत

ग्रामीणों के मुताबिक, बंदर अब इंसानी बस्तियों में भी पहुंचकर लोगों पर अचानक आक्रामक हमले कर रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों में परेशानी और चिंता बढ़ रही है।

समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग

स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की मांग है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों के आतंक को कम करने के लिए सरकार ठोस कदम उठाए। उनका कहना है कि प्रभावी व्यवस्था होने से किसान बिना लगातार नुकसान के भय के खेती कर सकेंगे, अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर पाएंगे और पलायन रोकने में भी मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट: पूजा बरमोला गैरसैण


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