देहरादून।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अंतर्मन सोसायटी द्वारा क्लेमेनटाउन क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने बिगड़ते पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “जीवन समुद्र से शुरू हुआ है और अब समुद्र से ही उसके अंत की सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है।”
समुद्र पृथ्वी के जीवन चक्र का आधार
अपने संबोधन में अनिल जोशी ने कहा कि मनुष्य का उपभोग लगातार बढ़ने के कारण समुद्र अत्यधिक प्रदूषित हो चुका है। उन्होंने कहा कि समुद्र पृथ्वी के जीवन चक्र का आधार है, लेकिन वर्तमान समय में सबसे अधिक संकट और असंतुलन समुद्र ही झेल रहा है।
कार्बन उत्सर्जन और युद्धों पर जताई चिंता
उन्होंने अमेरिका, चीन और रूस जैसी बड़ी शक्तियों द्वारा हो रहे अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अघोषित युद्ध और बढ़ता प्रदूषण पृथ्वी के लिए विनाशकारी साबित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ते कूड़े और प्रदूषण ने न केवल धरती बल्कि आकाश और समुद्र को भी प्रभावित किया है, जिससे पर्यावरण गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है।
हर व्यक्ति लगाए कम से कम 100 पौधे : चंद्रवीर गायत्री
भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ (BSPS) के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रवीर गायत्री ने पर्यावरणविद् अनिल जोशी के विचारों को पूरे विश्व के लिए चेतावनी बताते हुए कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 100 पौधे लगाने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समय से पहले फूलों का खिलना, बेमौसम बारिश और असमय बर्फबारी जैसी घटनाएं जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और बढ़ते प्रदूषण के कारण महानगरों में लोगों का सांस लेना तक मुश्किल हो रहा है। यदि मानव जीवन को सुरक्षित रखना है तो व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण करना होगा।
नगरायुक्त आलोक पांडेय ने भी रखे विचार
कार्यक्रम को नगरायुक्त आईएएस आलोक पांडेय ने भी संबोधित किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए सभी से इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
अंतर्मन सोसायटी ने किया पौध वितरण
कार्यक्रम में अंतर्मन सोसायटी की निदेशक सुषमा बछेती ने अतिथियों का स्वागत किया तथा पौध वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस अवसर पर सोसायटी के पदाधिकारी, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, उत्तराखंड सरकार की एनडीआरएफ टीम, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के छात्र एवं छावनी परिषद से जुड़े सैनिक परिवार भी उपस्थित रहे।
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