पहाड़ में दीपावली के बारहवें दिन मनाई जाने वाली बारह बग्वाल का विशेष महत्व, बदलती जीवनशैली से सिमट रही परंपराएं

चमोली। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में दीपावली के बारहवें दिन मनाई जाने वाली बारह बग्वाल का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। कभी यह पर्व भैलो की धमक, झुमेलो और चौंफला के लोकगीतों से गांवों को गुलजार कर देता था, लेकिन बदलती जीवनशैली और आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के चलते पारंपरिक रीति-रिवाज धीरे-धीरे सिमटते जा रहे हैं।

गौपूजन और पारंपरिक पकवानों की विशेष महत्ता

बारह बग्वाल पर पहाड़ में गौपूजन की विशेष परंपरा रही है। इस दिन ग्रामीण गायों को गुड़ और आटे से बनी विशेष गोलियां खिलाते हैं, जिन्हें स्थानीय पहाड़ी बोली में ‘पिड़ा’ कहा जाता है। गौ माता की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की जाती है।

इस अवसर पर उड़द की दाल के पकौड़े भी बनाए जाते हैं, जिन्हें पहाड़ के पारंपरिक बग्वाली पकवानों में विशेष स्थान प्राप्त है।

भैलो, झुमेलो और चौंफला से गुलजार रहते थे गांव

पहले बारह बग्वाल पर गांवों में सामूहिक रूप से भैलो खेलने की परंपरा थी। युवा और बुजुर्ग मिलकर इसकी तैयारी करते थे, वहीं महिलाएं झुमेलो और चौंफला के जरिए लोकगीतों और नृत्य की छटा बिखेरती थीं। पूरा गांव इस उत्सव में शामिल होता था। यह परंपरा आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती थी।

पलायन और आधुनिकता से प्रभावित हुईं परंपराएं

समय के साथ इन परंपराओं में कमी आई है। रोजगार और शिक्षा के लिए युवाओं का गांवों से बाहर जाना, पलायन तथा डीजे, मोबाइल और इंटरनेट का बढ़ता प्रभाव पारंपरिक आयोजनों को प्रभावित कर रहा है। डिजिटल मनोरंजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में नई पीढ़ी का अपनी लोकसंस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जुड़ाव भी कम होता जा रहा है।

लोकसंस्कृति को सहेजने की जरूरत

लोकसंस्कृति के जानकारों का मानना है कि भैलो, झुमेलो, चौंफला, गौपूजन और पारंपरिक पकवान केवल त्योहारों की रस्में नहीं, बल्कि पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान हैं। इन परंपराओं को जीवित रखने के लिए महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों, ग्राम पंचायतों और विद्यालयों को आगे आकर नई पीढ़ी को इनसे जोड़ना होगा।

आधुनिकता के साथ कदमताल करते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजना ही पहाड़ की पारंपरिक पहचान को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

रिपोर्ट: प्रदीप चौहान


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