उत्तरकाशी। मौसम में ठंडक घुलने के साथ माँ गंगा के शीतकालीन प्रवास मुखवा गाँव स्थित गंगा मंदिर परिसर में चहल-पहल बढ़ने लगी है और रोजाना 50 से 70 श्रद्धालु माँ गंगा के दर्शन को मुखवा पहुँच रहे हैं।
शीतकाल में गंगा दर्शन की यात्रा आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक सुंदरता की अनुभूति कराती है। समुद्र तल से 8,593 फीट की ऊँचाई पर स्थित मुखवा गाँव, जिला मुख्यालय उत्तरकाशी से करीब 83 किमी की दूरी पर है।
हर्षिल घाटी की उपला टकनौर पट्टी के आठ गाँवों में से एक मुखवा कई मायने में खास है। यहाँ पहाड़ी शैली में बने एक जैसे मकान और उनके बीच विराजमान गंगा मंदिर सम्मोहन-सा बिखेरता है।
अन्नकूट पर्व पर गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद माँ गंगा की डोली शीतकाल के लिए इसी मंदिर में प्रतिष्ठित होती है। वर्तमान में बाइकर्स ग्रुप के अलावा परिणय सूत्र में बँधने के लिए युवा जोड़े भी मुखवा पहुँच रहे हैं।
ऐसे पहुँचें
मुखवा गाँव तक सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। इसके लिए ऋषिकेश से चंबा व धरासू होते हुए उत्तरकाशी और फिर यहाँ से 80 किमी दूर हर्षिल पहुँचना पड़ता है। हर्षिल से तीन किमी की दूरी पर मुखवा गाँव है। देहरादून से मसूरी होते हुए सुवाखोली-नगुण-भवान मोटर मार्ग से भी उत्तरकाशी होते हुए मुखवा पहुँचा जा सकता है। यात्रा के दौरान गर्म कपड़े साथ लाना ज़रूरी है।
आसपास के दर्शनीय स्थल
हर्षिल: मुखवा का प्रमुख पड़ाव। यहाँ से कल-कल बहती भागीरथी नदी और देवदार के जंगल से घिरी हसीन वादियाँ पर्यटकों का मन मोह लेती हैं।
बगोरी: गंगा ग्राम बगोरी हर्षिल के निकट ही स्थित है। जाड़ समुदाय का यह गाँव अपने लकड़ी से निर्मित मकानों के लिए जाना जाता है। यहाँ सेब के बागीचे भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
लामा टाप: यहाँ से हर्षिल घाटी का मनमोहक नज़ारा दिखाई देता है। विशेष रूप से ग्रीष्मकाल में लोग लामा टाप पहुँचकर कैंपिंग व फोटोग्राफी का आनंद लेते हैं।
लक्ष्मीनारायण मंदिर: हर्षिल में भागीरथी नदी के किनारे स्थित इस प्राचीन मंदिर में कुछ समय महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने भी प्रवास किया था।
? व्हाट्सऐप पर शेयर करें
