कर्णप्रयाग: बद्रीश संस्कृत विद्यापीठ में ‘सम्पूर्ण पूजनप्रकाश-सौरभ’ पुस्तक का विमोचन—संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर हुई चर्चा

कर्णप्रयाग। बद्रीश संस्कृत विद्यापीठ डिम्मर, सिमली में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. मातराराम पुरोहित एवं श्री मनसाराम मैंदोली द्वारा रचित ‘सम्पूर्ण पूजनप्रकाश-सौरभ’ पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में विद्वानों, आचार्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन पर विचार व्यक्त किए गए।

धार्मिक ज्ञान को व्यवस्थित रूप से संकलित करने की पहल

वक्ताओं ने कहा कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा में संस्कृत भाषा और धार्मिक ग्रंथों का विशेष महत्व रहा है। पूजन एवं धार्मिक संस्कारों से संबंधित ज्ञान को व्यवस्थित रूप में संकलित कर पुस्तक के माध्यम से आमजन और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में भी सहायक साबित होंगे।

कार्यक्रम में बताया गया कि ‘सम्पूर्ण पूजनप्रकाश-सौरभ’ के माध्यम से धार्मिक अनुष्ठानों और पूजन पद्धतियों से जुड़े ज्ञान को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा केवल धार्मिक आस्थाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जीवन पद्धति, संस्कार और समाज को जोड़ने वाली व्यापक सांस्कृतिक विरासत भी समाहित है।

नई पीढ़ी तक पारंपरिक ज्ञान पहुंचाने पर जोर

कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ सनातन संस्कृति की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक दौर में पुस्तकों और साहित्य के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उससे जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

विद्वानों और गणमान्य नागरिकों ने दी शुभकामनाएं

इस अवसर पर पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता डीपी पुरोहित सहित अनेक गणमान्य नागरिक, विद्वान और गुरुजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पुस्तक के लेखकों एवं आयोजकों को इस ज्ञानवर्धक पहल के लिए शुभकामनाएं दी गईं।


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