हल्द्वानी। उत्तराखंड में पशुपालकों को दूध का उचित खरीद मूल्य दिलाने की मांग को लेकर किसान मंच ने आंदोलन का ऐलान किया है। मंगलवार को हल्द्वानी में आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन ने राज्य सरकार से पशुपालकों के हित में दो सप्ताह के भीतर ठोस निर्णय लेने की मांग की। किसान मंच ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपावत से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जाएगा।
किसान मंच के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि चारा, पशु आहार और पशुओं के इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन पशुपालकों को उनकी मेहनत के अनुरूप दूध का मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए पशुपालकों को दूध का सम्मानजनक खरीद मूल्य मिलना जरूरी है।
हिमाचल की तर्ज पर दूध के दाम तय करने की मांग
कार्तिक उपाध्याय ने हिमाचल प्रदेश में घोषित दूध खरीद दरों का हवाला देते हुए उत्तराखंड में भी पशुपालकों के लिए बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने की मांग उठाई। किसान मंच की मांग है कि गाय के दूध का खरीद मूल्य ₹61 प्रति लीटर और भैंस के दूध का ₹71 प्रति लीटर निर्धारित किया जाए।
संगठन के मुताबिक, 1 अक्टूबर को डेयरी विकास विभाग के निदेशक को ज्ञापन सौंपकर दो सप्ताह का समय दिया गया है। मंच ने कहा कि इस अवधि में सरकार के साथ बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद है।
पशुपालन और पलायन से जुड़ा मुद्दा बताया
प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता कुसुम लता बौड़ाई, युवा पहाड़ी के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल तिवारी, संरक्षक पीयूष जोशी और हल्द्वानी ब्लॉक अध्यक्ष ललित मोहन जोशी भी मौजूद रहे। उन्होंने पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पलायन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
किसान मंच ने कहा कि यदि निर्धारित दो सप्ताह में सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो चंपावत से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद आवश्यकता के अनुसार आंदोलन को कुमाऊं मंडल और पूरे उत्तराखंड तक विस्तार दिया जाएगा।
शांतिपूर्ण आंदोलन और व्यापक समर्थन की अपील
मंच ने किसान, पशुपालक और सामाजिक संगठनों से आंदोलन को समर्थन देने की अपील की है। संगठन ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा।
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