चमोली: DM गौरव कुमार ने PM-SETU और PM-NAPS योजनाओं की समीक्षा की—उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देने के निर्देश

चमोली, 10 सितंबर। जिलाधिकारी गौरव कुमार ने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के अंतर्गत संचालित पीएम-सेतु (PM-SETU) और पीएम-एनएपीएस (PM-NAPS) योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने युवाओं के प्रशिक्षण, एनरोलमेंट, अप्रेंटिसशिप, उद्योगों के साथ समन्वय और प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने की स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार हो प्रशिक्षण

प्रगति पोर्टल के माध्यम से हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने आईटीआई में दिए जा रहे प्रशिक्षण को उद्योगों की वर्तमान मांग के अनुरूप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिससे युवाओं को संस्थागत प्रशिक्षण पूरा करने के बाद रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

डीएम ने बाजार की मांग और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध रोजगार की संभावनाओं के अनुसार युवाओं का एनरोलमेंट बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।

बड़ी कंपनियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में बढ़ें अप्रेंटिसशिप के अवसर

पीएम-एनएपीएस की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने जनपद में कार्यरत बड़ी कंपनियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और संस्थानों में पात्र युवाओं के लिए अधिक से अधिक अप्रेंटिसशिप के अवसर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली कि वर्तमान में जनपद में अप्रेंटिसशिप के लिए कितनी कंपनियां पंजीकृत हैं, उनमें कितने अप्रेंटिस कार्यरत हैं और पंजीकृत प्रतिष्ठानों की संख्या बढ़ाने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं।

डीएम ने कहा कि युवाओं को केवल संस्थागत प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय वास्तविक कार्यस्थल पर व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए जिले की प्रमुख कंपनियों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों से निरंतर समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक अप्रेंटिसशिप अवसर सृजित किए जाएं।

सेवायोजन, उद्योग और आईटीआई मिलकर तैयार करें साझा कार्ययोजना

जिलाधिकारी ने जिला सेवायोजन कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र और जनपद के सभी आईटीआई को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग अलग-अलग स्तर पर कार्य करने के बजाय साझा कार्ययोजना के तहत उद्योगों की आवश्यकता, उपलब्ध रोजगार के अवसर और युवाओं के कौशल का समन्वय करें।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को आगे रोजगार हासिल करने में सुविधा हो, इसके लिए प्रशिक्षण और उद्योगों की वास्तविक जरूरत के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

स्थानीय उद्योगों की मैपिंग कर जरूरत के अनुसार हो हाई स्किलिंग

जिलाधिकारी ने जिला सेवायोजन अधिकारी और उद्योग विभाग को जनपद में संचालित स्थानीय उद्योगों की मैपिंग करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि विभिन्न उद्योगों में किस प्रकार के कुशल मानव संसाधन की आवश्यकता है।

उन्होंने निर्देश दिए कि उद्योगों की आवश्यकता के आधार पर आईटीआई में संबंधित ट्रेडों में प्रशिक्षण और हाई स्किलिंग को बढ़ावा दिया जाए। डीएम ने होटल एवं पर्यटन, निर्माण, सेवा क्षेत्र, विद्युत, ऑटोमोबाइल, मशीनरी सहित अन्य क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार की मांग का अध्ययन कर उसी के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया।

डिस्ट्रिक्ट स्किल कमेटी करेगी नियमित मॉनिटरिंग

जिलाधिकारी ने डिस्ट्रिक्ट स्किल कमेटी के माध्यम से कौशल विकास और अप्रेंटिसशिप से जुड़ी गतिविधियों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि कमेटी की बैठकों में आईटीआईवार एनरोलमेंट, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, ट्रेडवार युवाओं की संख्या, उद्योगों के साथ समन्वय, पंजीकृत कंपनियों और अप्रेंटिसशिप की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए।

हर पात्र प्रतिष्ठान से समन्वय कर युवाओं को जोड़ें

डीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को जनपद की प्रत्येक पात्र इंडस्ट्री और प्रतिष्ठान से समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि आईटीआई, सेवायोजन कार्यालय और उद्योग विभाग के बीच बेहतर समन्वय से ही कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सकता है। युवाओं को उनकी रुचि, योग्यता और संबंधित ट्रेड की रोजगार मांग के अनुसार अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि कौशल प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ उन्हें मिल सके।

बैठक में परियोजना निदेशक आनंद सिंह, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी विनय जोशी, जिला सेवायोजन अधिकारी अर्चना सजवान सहित विभिन्न आईटीआई के प्रधानाचार्य और संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।


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