देहरादून: नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों का अंग्रेजी अनुवाद, ‘ब्राइडल इमोशन’ पुस्तक का विमोचन

देहरादून। रस्किन बॉन्ड फाउंडेशन के तत्वावधान एवं भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ उत्तराखंड के सहयोग से लेखक मुकेश लाल द्वारा गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों का अंग्रेजी अनुवाद किया गया है। इस अनूठी पहल पर देहरादून में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित साहित्य, शिक्षा और लोककला से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियों ने इसकी सराहना की।

‘ब्राइडल इमोशन’ पुस्तक का हुआ विमोचन

देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, कवियों, गीतकारों, कलाकारों, फिल्मकारों, संगीतज्ञों और राजनीति से जुड़े लोगों ने भाग लिया। राज्य भाषा मंत्री खजान दास भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन नरेंद्र सिंह नेगी, पद्मश्री प्रीतम भरतवाण, मीना राणा, डॉ. डी.आर. पुरोहित, वरिष्ठ पत्रकार चंद्रवीर गायत्री, सिद्धार्थ बॉन्ड और लेखक मुकेश लाल ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों का गढ़वाली में गायन किया गया, जबकि मुकेश लाल ने उनके भावार्थ को अंग्रेजी में प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने बताया अंतरराष्ट्रीय पहल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुकेश लाल की पहल की सराहना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहल बताया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अनुवाद के माध्यम से अब विदेशों में भी लोग नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के भावार्थ को समझ सकेंगे और उत्तराखंड की लोक संस्कृति का विश्व स्तर पर प्रचार-प्रसार आसान होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी की रचनाओं में पहाड़ का जीवन, आम जनमानस, पहाड़ीपन और पहाड़ के सुख-दुख समाहित हैं। उन्होंने मुकेश लाल की उपलब्धि को पूरे राज्य की उपलब्धि बताया।

भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर जोर

राज्य भाषा मंत्री खजान दास ने गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की बात कही।

भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रवीर गायत्री ने कहा कि पत्रकारों को राज्य की लोक संस्कृति और भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने मुकेश लाल की पहल को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि संगठन साहित्यकारों, कलाकारों, फिल्मकारों और भाषाविदों से जुड़े ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करता रहेगा।

नरेंद्र सिंह नेगी ने भी की प्रशंसा

नरेंद्र सिंह नेगी ने मुकेश लाल के प्रयास को अनूठा बताते हुए इसकी सराहना की। उन्होंने कहा कि वह 1980 के दशक से गीत लेखन और गायन कर रहे हैं, लेकिन इस अनुवाद के माध्यम से उनके गीतों का भावार्थ अब विदेशों में भी लोग समझ सकेंगे।

उन्होंने कहा कि इससे गढ़वाली रीति-रिवाज, परंपराओं, पहाड़ के संघर्ष, जीवन और प्राकृतिक सुंदरता को अन्य भाषाओं के माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा।

डॉ. डी.आर. पुरोहित ने अनुवाद प्रक्रिया को बताया शोधपरक

अंग्रेजी के प्रोफेसर एवं शिक्षाविद डॉ. डी.आर. पुरोहित ने पुस्तक में किए गए अंग्रेजी शब्द चयन और भाषा प्रयोग की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गढ़वाली भावों को अंग्रेजी में सही अर्थ के साथ प्रस्तुत करना आसान कार्य नहीं है।

उन्होंने मुकेश लाल द्वारा गढ़वाली से हिंदी और फिर हिंदी से अंग्रेजी के माध्यम से भावार्थ तैयार करने की प्रक्रिया को शोध की श्रेणी में रखा। उनके अनुसार ऐसी पुस्तक नई पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक साबित हो सकती है।

पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने परिवार के योगदान को किया याद

कार्यक्रम को पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने भी संबोधित किया। उन्होंने मुकेश लाल के माता-पिता का स्मरण करते हुए उनके परिवार के लोक संगीत से जुड़े योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुकेश लाल ऐसे परिवार से आते हैं, जिसका पहाड़ी संगीत और लोक संस्कृति से गहरा संबंध रहा है।

उन्होंने परिवार के अन्य सदस्यों का उल्लेख करते हुए लोक संस्कृति, लोक परंपरा और लोक गायन के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान रस्किन बॉन्ड फाउंडेशन और रस्किन बॉन्ड का भी आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का संचालन कुमारी ध्रुव एवं गणेश कुशल गनी ने किया। इस अवसर पर मदन मोहन डुकलान, नंदकिशोर हटवाल, बिना बेंजवाल, उमा राणा, मुकेश कोहली, प्रशांत कुमार, नरेंद्र राठौड़, पुष्कर नेगी, राजेश जोशी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


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