यमकेश्वर छात्रसंघ चुनाव में ‘हाफ चाउमीन’ लिखी पर्ची चर्चा में—पूर्व सैनिक सुदेश भट्ट ने उठाए सवाल

ऋषिकेश (मनोज रौतेला)। चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह की गतिविधियां अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं। यमकेश्वर क्षेत्र में हुए छात्रसंघ चुनाव के दौरान ‘हाफ चाउमीन’ लिखी एक पर्ची सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। पर्ची पर हस्ताक्षर भी किए गए थे। इसे लेकर पूर्व सैनिक एवं जनप्रतिनिधि सुदेश भट्ट ने सवाल उठाए हैं।

चाय की दुकान पर मिली पर्ची से उठे सवाल

सुदेश भट्ट के अनुसार, उन्हें यह पर्ची एक चाय की दुकान पर मिली। उन्होंने कहा कि पर्ची ने उन्हें चुनाव और युवाओं की भूमिका को लेकर सोचने पर मजबूर किया।

भट्ट ने आरोप लगाया कि छात्रसंघ चुनाव के दौरान एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसी पर्चियां दी जा रही थीं, जिनके आधार पर छात्र-छात्राएं दुकान पर जाकर चाउमीन खा रहे थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

उनके अनुसार, चुनाव के दौरान छात्र-छात्राओं को वाहनों से लाया गया और दुकानों पर पर्चियां देकर खाने की व्यवस्था की गई। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चुनावी प्रक्रिया और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी पर सवाल उठाए।

‘हाफ चाउमीन’ को लेकर राजनीतिक चर्चा

भट्ट ने ‘हाफ चाउमीन’ लिखी पर्ची को लेकर युवाओं के बीच चुनावी राजनीति और मतदान के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने इसे युवाओं के राजनीतिक दृष्टिकोण और भविष्य से जोड़ते हुए चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनावों में हिस्सा लेने वाले युवा भविष्य की राजनीति और समाज का हिस्सा बनेंगे, इसलिए चुनावी प्रक्रिया में उनकी भूमिका और निर्णय महत्वपूर्ण हैं।

पर्ची को लेकर सोशल स्तर पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे चुनाव के दौरान किए जाने वाले प्रचार और समर्थकों को जुटाने की सामान्य गतिविधियों के रूप में देख रहे हैं, जबकि भट्ट ने इसे युवाओं के वोट और राजनीतिक सोच से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

‘चाइनीज एंट्री’ पर भी टिप्पणी

इस घटनाक्रम को लेकर भट्ट की ओर से व्यंग्यात्मक टिप्पणी भी की गई कि राजनीति में ‘चाइनीज एंट्री’ हो गई है, क्योंकि चाउमीन मूल रूप से चीन से जुड़ा व्यंजन है। हालांकि, यह टिप्पणी राजनीतिक आरोप के बजाय व्यंग्य के रूप में कही गई है।

सुदेश भट्ट वर्तमान में उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े हैं और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं।


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