ट्रॉमा चिकित्सा को मजबूत करने के लिए एम्स ऋषिकेश और स्वास्थ्य विभाग के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर

ऋषिकेश। पहाड़ी रास्तों पर होने वाले सड़क हादसों और आपदाओं के दौरान घायलों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड में ट्रॉमा चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल की गई है। इस दिशा में एम्स ऋषिकेश और राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में ट्रॉमा चिकित्सा सेवाओं, प्रशिक्षण और आपातकालीन उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों में समय पर उपचार बड़ी चुनौती

शनिवार को एम्स ऋषिकेश में वर्ल्ड ट्रॉमा वीक के समापन कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में दुर्घटनाओं और आपदाओं के दौरान घायलों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में एम्स ऋषिकेश ट्रॉमा चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एम्स के साथ समन्वय स्थापित कर प्रदेशभर में ट्रॉमा चिकित्सा के प्रशिक्षण और संचालन के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करेगी।

टेलीमेडिसिन और हेली एंबुलेंस से दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगी मदद

एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि ट्रॉमा टेलीमेडिसिन और एयरो मेडिकल सेवाएं दूरस्थ एवं आपदा प्रभावित क्षेत्रों में घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण साबित हो रही हैं। तकनीक आधारित इन सेवाओं से गंभीर मरीजों तक आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाने में मदद मिल रही है।

उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं के दौरान घायलों की मदद करने और प्राथमिक उपचार के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

ट्रॉमा वीक के आयोजन सचिव एवं ट्रॉमा सर्जन डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि एम्स की इमरजेंसी हेली एंबुलेंस सेवा के माध्यम से अब तक 354 लोगों का रेस्क्यू कर उपचार किया जा चुका है। उन्होंने प्रदेश की 108 एंबुलेंस सेवा की क्लीनिकल ऑडिट कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, इससे आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन करने और ट्रॉमा मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

मेडिकल कॉलेजों के स्टाफ को मिलेगा ट्रॉमा चिकित्सा का प्रशिक्षण

एमओयू के तहत प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सकों के साथ नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को भी ट्रॉमा चिकित्सा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं और आपदाओं में घायल लोगों को शुरुआती स्तर पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराना और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

कार्यक्रम के दौरान एम्स की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह, ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कमर आजम, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल और प्रो. आशुतोष सयाना की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

चिकित्सकों और सहयोगी विभागों के सदस्यों का सम्मान

वर्ल्ड ट्रॉमा वीक के आयोजन में योगदान देने वाले चिकित्सकों, नर्सिंग अधिकारियों, तकनीशियनों तथा परिवहन, पुलिस और वन विभाग के सदस्यों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रो. जया चतुर्वेदी, प्रो. पुनीत धमीजा सहित संस्थान के चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे।


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