कर्णप्रयाग (चमोली)। सिमली में बेस अस्पताल की मांग को लेकर रविवार को क्षेत्रवासियों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के साथ निकाली गई पदयात्रा में क्षेत्र के करीब 30 से 40 गांवों के हजारों महिला-पुरुषों, ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। पदयात्रा के माध्यम से ग्रामीणों ने सरकार से सिमली बेस अस्पताल का शासनादेश जल्द जारी करने की मांग उठाई।
पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने अस्पताल की मांग को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन को सामने रखा। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण गंभीर बीमारी और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को उपचार के लिए दूर-दराज के अस्पतालों में जाना पड़ता है। ऐसे में सिमली में बेस अस्पताल की स्थापना क्षेत्र की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
शासनादेश जारी होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
बेस अस्पताल संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से इस मांग को उठाया जा रहा है। रविवार को निकाली गई पदयात्रा में शामिल लोगों ने एकजुट होकर सरकार से जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। अस्पताल के संबंध में शासनादेश जारी कर आगे की प्रक्रिया स्पष्ट की जानी चाहिए। ‘बेस नहीं तो वोट नहीं’ के नारे के जरिए ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर अपनी मांग को प्रमुखता से सामने रखा।
भाजपा से जुड़े देवेंद्र नेगी ने भी दी इस्तीफे की चेतावनी
सिमली बेस अस्पताल की मांग को लेकर भाजपा से जुड़े देवेंद्र (मुन्ना) नेगी का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार अस्पताल के संबंध में शासनादेश जारी नहीं करती है, तो वह भाजपा से इस्तीफा दे देंगे।
उनके इस बयान से स्पष्ट है कि अस्पताल की मांग को लेकर उठ रही आवाज राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन रही है। हालांकि, शासनादेश जारी करने को लेकर सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अहम हुआ मुद्दा
आगामी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सिमली बेस अस्पताल की मांग क्षेत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल होती दिखाई दे रही है। एक ओर ग्रामीण पदयात्रा के माध्यम से सरकार पर निर्णय लेने का दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा से जुड़े नेता की इस्तीफे की चेतावनी ने भी इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। पदयात्रा के जरिए ग्रामीणों ने संदेश दिया कि वे इस मांग को लेकर एकजुट हैं और अब उनकी अपेक्षा आश्वासनों के बजाय ठोस निर्णय की है।
रिपोर्ट: प्रदीप चौहान
? व्हाट्सऐप पर शेयर करें
