देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के बाद सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सड़कों पर गड्ढों और क्षतिग्रस्त मार्गों की शिकायतों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सड़क मार्ग से प्रदेश का दौरा करने और सड़कों की स्थिति का जायजा लेने की बात सामने आई है। खराब सड़कें मिलने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात भी कही गई है।
सड़कों की मरम्मत में तेजी लाने पर जोर
प्रदेश में बरसात के बाद गढ़वाल से कुमाऊं तक कई मार्गों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से सामने आने की शिकायतें मिलती रही हैं। चारधाम यात्रा मार्ग सहित प्रमुख सड़कों की स्थिति को लेकर भी लोगों की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं।
देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर जैसे शहरों में आंतरिक मार्गों की स्थिति भी चर्चा का विषय रही है। खराब सड़कों के कारण आम लोगों, व्यापारियों, स्कूली बच्चों और मरीजों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ऐसे में लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े अधिकारियों के लिए क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
औचक निरीक्षण और जवाबदेही पर चर्चा
सड़क निरीक्षण की प्रस्तावित रणनीति के तहत मुख्यमंत्री के विभिन्न जिलों में सड़क मार्ग से पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य सड़कों की वास्तविक स्थिति और मरम्मत कार्यों की प्रगति का आकलन करना बताया जा रहा है।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच, मरम्मत कार्यों की निगरानी और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करना भी इस मुद्दे के अहम पहलू हैं। हालांकि, जिलाधिकारियों द्वारा हर सप्ताह 50 किलोमीटर सड़क का निरीक्षण करने, थर्ड पार्टी ऑडिट और 48 घंटे में शिकायतों पर कार्रवाई जैसे विशिष्ट प्रावधानों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
सड़कों की बदहाली से आम जनता परेशान
बरसात के बाद सड़कों पर बने गड्ढों से वाहन चालकों को परेशानी होती है। क्षतिग्रस्त मार्गों पर दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में खराब सड़कें मरीजों को अस्पताल पहुंचाने और दैनिक आवागमन में अतिरिक्त कठिनाइयां पैदा कर सकती हैं।
चारधाम यात्रा और पर्यटन से जुड़े मार्गों की स्थिति बेहतर बनाए रखना भी जरूरी है, क्योंकि इन मार्गों पर स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आवाजाही करते हैं।
मरम्मत कार्यों की निगरानी होगी अहम
सड़कों को बेहतर बनाने के लिए केवल गड्ढे भरना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता और टिकाऊपन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। संबंधित विभागों को क्षतिग्रस्त हिस्सों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर काम करना होगा।
यदि सड़क निरीक्षण और मरम्मत के प्रयास प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो आम लोगों को आवागमन में राहत मिल सकती है। फिलहाल, मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे और सड़क सुधार से जुड़े विशिष्ट निर्देशों की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी स्पष्ट होगी।
? व्हाट्सऐप पर शेयर करें
