दून अस्पताल की इमरजेंसी में हथियारबाजी, डॉक्टरों ने जताई सुरक्षा पर चिंता

देहरादून (जसपाल राणा)। राजधानी देहरादून के दून अस्पताल की इमरजेंसी में कथित तौर पर धारदार हथियार लहराने और हंगामा करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि दो पक्षों के बीच बाहर हुए विवाद के बाद कुछ युवक अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंचे और इमरजेंसी वार्ड में गाली-गलौज करते हुए एक-दूसरे को धमकाने लगे। घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

इमरजेंसी वार्ड में हंगामे से मची अफरा-तफरी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून के किसी क्षेत्र में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद मारपीट हुई थी। इसमें कुछ लोगों को चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए दून अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया।

आरोप है कि इसके बाद दूसरे पक्ष के लोग भी अपने साथियों के साथ अस्पताल पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया गया कि 8 से 10 युवक चाकू जैसे धारदार हथियार लेकर इमरजेंसी वार्ड में घुसे और वहां हंगामा करने लगे।

उस समय इमरजेंसी में गंभीर मरीजों का उपचार चल रहा था और महिलाएं तथा बच्चे भी मौजूद थे। हथियारों के साथ युवकों के पहुंचने से वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने का प्रयास किया।

हालांकि, घटना के समय और अवधि सहित पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है।

डॉक्टरों ने सुरक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों और इमरजेंसी में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों में नाराजगी की बात सामने आई है। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में मरीजों का उपचार करने के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

डॉक्टरों ने सवाल उठाया कि अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी होने के बावजूद इमरजेंसी वार्ड में इस तरह की स्थिति कैसे बनी। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

मेटल डिटेक्टर और पुलिस तैनाती की मांग

डॉक्टरों की ओर से इमरजेंसी वार्ड के प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर लगाने, प्रत्येक शिफ्ट में पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और अस्पताल में हंगामा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग किए जाने की जानकारी सामने आई है।

रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी घटना पर नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ तो कार्य बहिष्कार जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। इनमें इमरजेंसी वार्ड में धारदार हथियारों के साथ लोगों के प्रवेश, सुरक्षा गार्डों की भूमिका और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया जैसे मुद्दे शामिल हैं।

मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। इमरजेंसी वार्ड में किसी भी तरह का विवाद गंभीर मरीजों के उपचार और अस्पताल के सामान्य कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

पुलिस कार्रवाई पर नजर

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल प्रशासन की ओर से घटना की रिपोर्ट पुलिस को दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, मुकदमा दर्ज होने और आरोपियों की पहचान या गिरफ्तारी की स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में घटना से जुड़े आरोपों की जांच और सीसीटीवी फुटेज सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा।

डॉक्टरों की सुरक्षा फिर चर्चा में

दून अस्पताल की इमरजेंसी में कथित हथियारबाजी की घटना ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर विवाद और हिंसा की स्थिति को रोकने के लिए प्रभावी निगरानी, पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों और त्वरित पुलिस सहायता की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।


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