दूधातोली: मध्य हिमालय का ‘उत्तराखंड का पामीर’—चारों दिशाओं में बहती हैं जलधाराएं, पांच नदियों का उद्गम स्थल

पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के मध्य हिमालय में स्थित दूधातोली अपनी भौगोलिक संरचना, प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए विशेष पहचान रखता है। विशाल पर्वतीय विस्तार और यहां से विभिन्न दिशाओं में निकलने वाली जलधाराओं के कारण इसे ‘उत्तराखंड का पामीर’ कहा जाता है। दूधातोली पर्वत श्रृंखला पौड़ी गढ़वाल, चमोली और अल्मोड़ा जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग 25 किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है।

चारों दिशाओं में बहती हैं जलधाराएं

दूधातोली की भौगोलिक विशेषता इसे अन्य पर्वतीय क्षेत्रों से अलग पहचान देती है। जिस प्रकार पामीर के पठार से विभिन्न दिशाओं में पर्वत श्रृंखलाएं और नदियां निकलती हैं, उसी प्रकार दूधातोली के उच्च भाग से भी चारों दिशाओं में जलधाराएं और नदियां बहती हैं।

दूधातोली क्षेत्र की ऊंचाई समुद्र तल से करीब 2,400 से 3,100 मीटर के बीच बताई गई है। यहां का सबसे ऊंचा शिखर मूसा का कोठा बताया जाता है, जिसकी ऊंचाई लगभग 2,114 मीटर (10,217 फीट) है।

‘दूधातोली’ नाम की अपनी अलग कहानी

दूधातोली नाम की उत्पत्ति भी क्षेत्र की पशुपालन परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। गढ़वाली में ‘तोली’ का अर्थ दूध उबालने के बर्तन से है। प्राचीन समय से यहां के बुग्याल पशुपालकों के लिए चारागाह रहे हैं और क्षेत्र में बड़ी मात्रा में दूध का उत्पादन होता था। इसी कारण इसका नाम दूधातोली पड़ा।

पांच प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल

दूधातोली को जलस्रोतों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से पश्चिमी रामगंगा, पूर्वी नयार, पश्चिमी नयार, आटागाड़ और बिनो पांच प्रमुख नदियों के निकलने का उल्लेख मिलता है।

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की समाधि स्थल

दूधातोली का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी काफी खास है। यहां महान पेशावर कांड के नायक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली की समाधि स्थित है। कोदियाबगड़ में बनी यह समाधि उनके कर्मस्थल और पसंदीदा स्थान से जुड़ी मानी जाती है।

हर वर्ष 12 जून को यहां स्थानीय मेले का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। दूधातोली के निकट भगवान बिनसर महादेव का प्राचीन शिव मंदिर भी स्थित है, जहां श्रद्धालु प्रतिवर्ष दर्शन और मनोकामना के लिए पहुंचते हैं।

बांज-बुरांश और देवदार से समृद्ध वन क्षेत्र

दूधातोली की प्राकृतिक संपदा भी इसकी पहचान का प्रमुख हिस्सा है। यहां बांज, बुरांश, देवदार और सुराई सहित विभिन्न प्रजातियों के वृक्ष पाए जाते हैं। इसके अलावा क्षेत्र में अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियां और विभिन्न वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास भी है।

प्रकृति प्रेमियों के लिए शांत पर्यटन स्थल

प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के कारण दूधातोली प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां आने वाले पर्यटक पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता, बुग्यालों और वन क्षेत्र का आनंद ले सकते हैं।

क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही के लिए अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर का समय पसंद किया जाता है। वहीं सर्दियों में दूधातोली में काफी बर्फबारी होती है, जिससे पूरा क्षेत्र बर्फ की चादर से ढक जाता है।


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