देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को गढ़ी कैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में वीर गोरखा कल्याण समिति की ओर से आयोजित गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेला-2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने गोरखा समाज के लोगों को दशैं और दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह महोत्सव समाज की गौरवशाली संस्कृति, समृद्ध परंपराओं और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दशैं का पर्व अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है, जबकि दीपावली अंधकार पर प्रकाश और निराशा पर आशा की जीत का प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी विरासत को संरक्षित रखने के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने आयोजन के लिए वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारियों और पूरी आयोजन टीम की सराहना की।
गोरखा वीरों का शौर्य देश के लिए प्रेरणास्रोत
मुख्यमंत्री ने गोरखा समाज की वीरता, साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस समाज का इतिहास त्याग, बलिदान और अदम्य शौर्य की गाथाओं से भरा है। गोरखा समाज केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत का गौरव है। देश की सीमाओं की रक्षा में गोरखा वीरों ने सदैव अद्वितीय साहस, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया है।
उन्होंने गोरखा समाज के आदर्श वाक्य “कायर हुनुभन्दा मर्नु राम्रो” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ कायर बनकर जीने से बेहतर वीरता के साथ प्राण न्योछावर करना है। यह वाक्य समाज के अदम्य साहस और स्वाभिमान की भावना को दर्शाता है। मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व समर्पित करने की यह भावना पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखा समाज ने देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ उत्तराखंड के निर्माण और विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शिक्षा, खेलकूद, कला, साहित्य और समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में समाज के लोगों ने अपनी प्रतिभा और समर्पण से प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
भारत-नेपाल के संबंध सांस्कृतिक और पारिवारिक जुड़ाव पर आधारित
मुख्यमंत्री ने भारत और नेपाल के पारंपरिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गहरे सांस्कृतिक, सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव पर आधारित हैं। भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का आत्मीय संबंध सदियों से कायम है।
उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र से आने के कारण उन्होंने बचपन से ही दोनों देशों के बीच साझा संस्कृति, पारिवारिक संबंधों और आपसी आत्मीयता को करीब से अनुभव किया है।
गोरखा समाज की भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गोरखा समाज के सर्वांगीण विकास के साथ उसकी भाषा, कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने बताया कि हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय में नेपाली भाषा के अध्ययन के लिए डिप्लोमा और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा नेपाली भाषा और साहित्य को संस्थागत स्तर पर प्रोत्साहन देने के लिए नेपाली अकादमी को उत्तराखंड भाषा संस्थान के दायरे में लाने की पहल की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवा पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान से जोड़े रखना है, ताकि वे अपनी विरासत को आगे बढ़ाने पर गर्व महसूस करें।
महिला सशक्तीकरण पर जोर, तीन लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण को राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि महिलाओं की उन्नति से ही परिवार, समाज और प्रदेश की वास्तविक प्रगति सुनिश्चित होती है। इसी सोच के तहत राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था लागू की है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। यह महिलाओं को समान अधिकार और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लखपति दीदी अभियान संचालित किया जा रहा है। प्रदेश की तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। ये महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रही हैं।
सीमांत क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और व्यापार बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक एवं पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने के साथ सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और आवागमन के साधनों का विस्तार करना केंद्र और राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने भारत-नेपाल सीमा पर महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और क्षेत्रीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में छारछुम पुल परियोजना के माध्यम से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच आवागमन और व्यापारिक संपर्क बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बनबसा में लगभग 368 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत से एकीकृत चेक पोस्ट का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्र में ड्राई पोर्ट विकसित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों और परिवहन सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारतमाला परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-9 पर सितारगंज-टनकपुर मार्ग से बनबसा स्थित भारत-नेपाल सीमा तक लगभग 246 करोड़ 86 लाख रुपये की लागत से चार लेन कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है।
सीमांत क्षेत्रों के विकास से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में सड़क, पुल, व्यापार और परिवहन सुविधाओं को मजबूत करना तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल देश की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि ये हमारी सांस्कृतिक पहचान और आर्थिक विकास के भी प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए इन क्षेत्रों का समग्र विकास सरकार की विशेष प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि गोरखा समाज के सहयोग और सहभागिता से उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने समाज के सम्मान, विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए सभी से प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प में सहयोग करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज सहित गोरखा समाज के गणमान्य व्यक्ति, वीर गोरखा कल्याण समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
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