भराड़ीसैंण में विधानसभा घेराव के दौरान घायल प्रदर्शनकारियों की मदद को आगे आए पुलिस जवान

भराड़ीसैंण (गैरसैंण)। उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान भराड़ीसैंण में विरोध-प्रदर्शन के बीच पुलिस का मानवीय चेहरा भी सामने आया। विधानसभा घेराव के दौरान बैरिकेडिंग से टकराने के कारण कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ-पैरों में चोटें आईं। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मी उनकी मदद के लिए आगे आए। जवानों ने घायलों के हाथ-पैरों पर पट्टियां बांधकर उन्हें राहत पहुंचाई और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया।

जब कर्तव्य के साथ मानवीय जिम्मेदारी भी निभाई

विधानसभा घेराव के दौरान एक ओर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारी थे, तो दूसरी ओर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिसकर्मी। दोनों के बीच बैरिकेडिंग थी, लेकिन जब चोट से परेशान प्रदर्शनकारियों को मदद की जरूरत पड़ी, तो पुलिस जवानों ने आगे बढ़कर उनकी सहायता की।

पुलिसकर्मियों के इस व्यवहार ने विरोध-प्रदर्शन के बीच मानवीय संवेदनाओं की अहमियत को सामने रखा। वैचारिक मतभेदों और अलग-अलग पक्षों के बीच खड़े होने के बावजूद घायलों की मदद करना इस बात का संदेश दे गया कि मानवता किसी भी परिस्थिति में सबसे महत्वपूर्ण है।

विरोध और असहमति के बीच मानवता का संदेश

भराड़ीसैंण में सामने आया यह दृश्य लोकतंत्र में विरोध और असहमति के अधिकार के साथ मानवीय संवेदनशीलता की अहमियत को भी रेखांकित करता है। बैरिकेडिंग ने भले ही पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच दूरी बनाई हो, लेकिन चोटिल लोगों की सहायता के लिए बढ़े हाथों ने उस दूरी को कम कर दिया।

पुलिस जवानों की इस पहल ने यह संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने के साथ जरूरतमंदों की मदद करना भी मानवीय कर्तव्य है।

रिपोर्ट: प्रदीप चौहान


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