जामानवाला में रामलीला का भव्य शुभारंभ, भरत मिलाप के प्रसंग ने दर्शकों को किया भावविभोर

जामानवाला। ग्राम जामानवाला में आयोजित रामलीला मंचन का भव्य शुभारंभ समाजसेवी पंडित (डॉ.) डी.पी. हरिवंशी और श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती योगिता जोशी ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में पहुंचने पर रामलीला समिति के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने दोनों अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और ग्रामीण मौजूद रहे।

रामलीला मंचन के दौरान भरत मिलाप का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम के वनवास के बाद भरत का उनसे मिलने पहुंचना, दोनों भाइयों के बीच प्रेम, त्याग और समर्पण से भरे संवादों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

रामलीला भारतीय संस्कृति और संस्कारों का जीवंत माध्यम: डी.पी. हरिवंशी

मुख्य अतिथि समाजसेवी पंडित (डॉ.) डी.पी. हरिवंशी ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन या धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, संयम, कर्तव्य और सेवा का मार्ग दिखाता है।

उन्होंने कहा कि भरत मिलाप का प्रसंग भाईचारे, त्याग और निस्वार्थ प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। भरत ने राजसत्ता के मोह से दूर रहकर श्रीराम के प्रति जिस प्रेम और समर्पण का परिचय दिया, वह आज के समाज के लिए भी प्रेरणादायी है।

उन्होंने युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखना हम सभी की जिम्मेदारी: योगिता जोशी

श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती योगिता जोशी ने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन समाज को एकजुट करने के साथ-साथ गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाकर प्रेम, सद्भाव, सेवा और भाईचारे की भावना को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों और युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने रामलीला समिति और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

भरत मिलाप के मंचन ने बांधा समां

रामलीला के दौरान भगवान श्रीराम और भरत के मिलन का दृश्य प्रस्तुत होते ही वातावरण भावुक हो उठा। कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से दोनों भाइयों के बीच प्रेम, त्याग और समर्पण की भावना को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने प्रसंग का भावपूर्ण आनंद लिया और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

कार्यक्रम में रामलीला समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों के अलावा क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, धार्मिक श्रद्धालु, युवा और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। इस दौरान पूरा रामलीला परिसर “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंजता रहा।

ग्रामीणों ने कहा कि रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति का संदेश घर-घर तक पहुंचता है। उन्होंने आयोजन समिति की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की।

रिपोर्ट: प्रदीप चौहान

 

 


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