अकेलेपन से परेशान 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला की थराली पुलिस ने की मदद, परिजनों के सुपुर्द किया

संवाददाता: चमोली।

अकेलेपन से परेशान 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मदद के लिए थराली पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित परिजनों के सुपुर्द किया। डायल-112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और महिला से आत्मीयता के साथ बातचीत कर उनकी परेशानी समझी। इसके बाद परिजनों को थाने बुलाकर महिला को उनके साथ भेज दिया गया। साथ ही परिजनों को बुजुर्ग की भावनात्मक जरूरतों को समझने और उनकी बेहतर देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।

डायल-112 पर मिली सूचना, पुलिस ने दिखाई तत्परता

जानकारी के अनुसार, थराली पुलिस को डायल-112 के माध्यम से एक बुजुर्ग महिला के परेशान अवस्था में होने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला से संवेदनशीलता के साथ बातचीत की। इस दौरान महिला ने अकेलेपन और जीवन से निराशा महसूस करने की बात कही।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महिला को सुरक्षित थाने लेकर आई। यहां थानाध्यक्ष ने भी उनसे बातचीत कर उनकी परेशानी जानने का प्रयास किया।

उम्र के साथ बढ़ा अकेलेपन का एहसास

बातचीत के दौरान बुजुर्ग महिला ने बताया कि उनकी उम्र के अधिकांश लोग अब जीवित नहीं हैं, जिसके कारण वह स्वयं को अकेला महसूस करती हैं। महिला ने अपने परिजनों के प्रति कोई शिकायत भी नहीं जताई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने महिला की पुत्री और अन्य परिजनों को थाने बुलाया। परिजनों ने बताया कि वृद्धावस्था के कारण महिला शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजर रही हैं।

परिजनों को समझाया, भावनात्मक सहयोग देने की अपील

पुलिस ने परिजनों को समझाया कि बुजुर्गों को केवल शारीरिक देखभाल ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों के समय, साथ और भावनात्मक सहयोग की भी जरूरत होती है। उनसे महिला के साथ नियमित संवाद बनाए रखने तथा उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई।

इसके बाद पुलिस ने बुजुर्ग महिला को उनकी पुत्री और दामाद के सुपुर्द कर दिया।

बुजुर्गों को दें अपनापन और भावनात्मक सहारा

चमोली पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों की भावनाओं को समझें और उनके साथ समय बिताएं। कई बार उनकी बातें धैर्यपूर्वक सुनना और उन्हें अपनेपन का एहसास कराना भी बड़ी मदद साबित होता है।

पुलिस ने कहा कि बुजुर्गों को यह महसूस कराना जरूरी है कि परिवार उनके साथ खड़ा है और वे अकेले नहीं हैं।

रिपोर्ट: प्रदीप चौहान

 


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