- सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल को एम्स चिकित्सकों ने घोषित किया था ब्रेन डेड
- बीते माह 21 अप्रैल से चल रहा था एम्स ऋषिकेश में उपचार
ऋषिकेश : ईश्वर के बाद यदि कोई किसी इंसान को जिंदगी दे सकता है, तो वह सिर्फ अंगदान का पुण्य कार्य करने वाला व्यक्ति ही हो सकता है। और इस पुण्य के साक्षी और सशक्त माध्यम बनते हैं कलियुग में भगवान कहे जाने वाले चिकित्सक। एम्स, ऋषिकेश में बीती रात कुछ ऐसा ही करिश्मा हुआ। जिसने न सिर्फ चिकित्सकीय इतिहास को पलट कर रख दिया अपितु इसके साथ-साथ एम्स ऋषिकेश ने प्रतिबद्धता, संकल्प के साथ सफलतम चिकित्सा का एक नया कीर्तिमान भी रच दिया है। इस प्रक्रिया के तहत एम्स, ऋषिकेश ने उत्तराखंड में पहला लीवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक अंजाम दिया, साथ ही संस्थान में बीते 3 वर्षों में 23वें व्यक्ति को सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण किया गया।
बात करीब दस दिन पुरानी है। बीते माह 21 अप्रैल को एक सड़क दुर्घटना में एक 23 वर्षीय युवती गंभीर रूप से घायल हो गई। जिसे समुचित उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान बीते बृहस्पतिवार को युवती को चिकित्सकीय टीम ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद एम्स संस्थान के चिकित्सकों ने युवती के परिजनों को युवती के अंग जरूरतमंद लोगों को दान कर उन्हें नया जीवन देने के पुण्य कार्य के लिए प्रेरित किया। चिकित्सकों के परामर्श के बाद अपनी जवान बेटी को खो चुके परिजनों ने मौत से जूझ रहे किसी व्यक्ति को जिंदगी देने का फैसला किया और एम्स की चिकित्सकीय टीम को अंगदान की लिखित अनुमति प्रदान कर दी। युवती के परिजनों के इस निर्णय से जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई। यह सब एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों की टीम के सामूहिक संकल्पबद्ध प्रयासों से ही सफल हो पाया।
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एम्स, ऋषिकेश में हुआ पहला लीवर ट्रांसप्लांट
एक साथ हुए किडनी व लीवर प्रत्यारोपण
रातभर तत्परता से जीवन बचाने में जुटे रहे एम्स के चिकित्सक और टीम
एम्स, ऋषिकेश में बीते माह एक 23 वर्षीय युवती सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जहाँ ट्रॉमा सेंटर में चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा था। बीते दिवस इलाज में जुटे डॉक्टरों की टीम ने युवती को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद लंबे अरसे से किडनी की बीमारी से जूझ रहे दो लोगों को युवती की दोनों किडनी और एक अन्य लीवर की बीमारी से जूझ रहे एक व्यक्ति को एम्स, ऋषिकेश में पहली बार लीवर ट्रांसप्लांट कर नया जीवन दिया गया। खास बात यह रही कि यह दोनों जटिलतम शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएं एक साथ चलीं और पूरी तरह से सफल रहीं। जबकि एक व्यक्ति को अंग प्रत्यारोपण दिल्ली एम्स में किया गया।
निदेशक एम्स प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह एवं संस्थान प्रबंधन ने संस्थागत स्तर पर अपनी तरह की इस पहली सफल उपलब्धि के लिए चिकित्सकीय टीम की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। परिजनों की सहमति प्राप्त होने के बाद एम्स ऋषिकेश में पहली बार सफलतापूर्वक पहला लीवर ट्रांसप्लांट अंजाम दिया गया। बताया गया है कि नेशनल ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) की सहायता से अंगदान के लिए जरूरतमंद मरीजों का पता लगाया गया और इसके बाद NOTTO के तहत अंग दान के लिए आवंटित किए गए।
गौरतलब है कि ऋषिकेश एम्स की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह की अध्यक्षता में संस्थान में बीते कुछ वर्षों से लीवर ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग संचालित की जा रही है। जिसके अंतर्गत बीते बृहस्पतिवार की रात निदेशक एम्स के निर्देशन में संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की तर्ज पर एम्स ऋषिकेश में लीवर प्रत्यारोपण पूरी तरह से सफल रहा। बताया गया कि एम्स ऋषिकेश में बीते बृहस्पतिवार की रात करीब 9 बजे अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमें एम्स संस्थान के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। इस कार्य को संस्थान के एक ही ओटी कॉम्प्लेक्स में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। जिसके तहत एक साथ दो मरीजों को अंग प्रत्यारोपित किए गए। प्रक्रिया के अंतर्गत एक मरीज से अंग लिए गए जबकि एक मरीज को किडनी और दूसरे को लीवर ट्रांसप्लांट किया गया। इस जटिलतम प्रक्रिया को पहली बार सफलता से संपन्न कराने से पता चलता है कि संस्थान में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कितनी बड़ी टीम लोगों को जीवनदान देने के लिए अपनी उपयोगिता के साथ ही योग्यता को सिद्ध करने में जुटी हुई है।
बताया गया है कि यह संपूर्ण जटिलतम शल्य चिकित्सा प्रक्रिया बीते बृहस्पतिवार की रात 9 बजे शुरू की गई जो कि लगभग 13 घंटे यानि शुक्रवार सुबह 10 बजे तक चली।
टीम में ये विशेषज्ञ रहे शामिल –
अंग प्रत्यारोपण को सफल बनाने वाली टीम में इन विशेषज्ञों ने अपना योगदान दिया। जिसके अंतर्गत अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रांजल मोदी के मार्गदर्शन एवं गाइडेंस में एम्स अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डॉ. बी. सत्यश्री, संस्थान के डॉ. कर्मवीर सिंह, डॉ. रजनीश अरोड़ा, डॉ. वाईएस पयाल, डॉ. अंकुर मित्तल, डॉ. विकास पवार, डॉ. रोहित गुप्ता, डॉ. आनंद शर्मा, डॉ. कल्याणी, डॉ. शैरोन कंडारी, डॉ. भारती, डॉ. भारत भूषण भारद्वाज, डॉ. सारंग भारती आदि विशेषज्ञ चिकित्सक अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने में शामिल रहे।
दिल्ली एम्स भेजे गए एक किडनी और पैनक्रियाज –
ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से डोनेट की गई एक किडनी और पैनक्रियाज को किसी जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित करने के लिए बीती बृहस्पतिवार की रात में ही दिल्ली एम्स को भेजा गया है। बताया गया है कि एम्स दिल्ली को भेजे गए अंगों का प्रत्यारोपण पूरी तरह से सफल रहा।
क्या कहती हैं निदेशक एम्स –
सफलता का यह पहला पायदान है, एम्स संस्थान इस दिशा में आगे तीव्र गति से सतत रूप से कार्य करते हुए उत्तराखंड के लोगों की चिकित्सा सेवा का कार्य करेगा। इसके साथ ही उन्हें अंगदान को लेकर जागरूक भी किया जाएगा। जिससे स्थानीय स्तर पर लोग स्वैच्छिक तौर पर अंगदान प्रत्यारोपण के लिए आगे आने को प्रेरित हों और इस कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले सकें। आम नागरिकों को भी जीवन के लिए जूझ रहे लोगों के लिए अंगदान के लिए आगे आना चाहिए, जिससे समाज में दूसरे लोगों को भी सकारात्मक संदेश मिल सके।
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