नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोकगायिका हेमा नेगी करासी को 19 अक्टूबर 2026 को प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार–2024 से सम्मानित किया गया। समाचार में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इसे उत्तराखंड की लोकसंगीत परंपरा, मांगल गीतों और लोकजागर की समृद्ध विरासत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
लोकधुनों में बसती है पहाड़ की आत्मा
हेमा नेगी करासी ने अपनी गायकी के माध्यम से उत्तराखंड के पारंपरिक लोकगीतों, मांगल गीतों और लोकजागर को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी प्रस्तुतियों में पहाड़ का लोकजीवन, पारंपरिक रीति-रिवाज, सामाजिक संवेदनाएं और देवभूमि की सांस्कृतिक आस्थाएं झलकती हैं।
उनकी कला का उद्देश्य केवल मंच पर प्रस्तुति देना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर गाए जाने वाले पारंपरिक मांगल गीतों से लेकर लोकजागर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा तक, उनकी गायकी उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करने का प्रयास करती है।
संघर्ष, साधना और समर्पण का सम्मान
किसी भी कलाकार की सफलता के पीछे वर्षों की साधना, कठिन परिश्रम और अपनी कला के प्रति अटूट निष्ठा होती है। हेमा नेगी करासी की सांस्कृतिक यात्रा भी लोकसंगीत के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से पहाड़ की लोकविधाओं को व्यापक मंच तक पहुंचाने और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का प्रयास किया है।
संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ युवा पुरस्कार प्रदर्शनकारी कलाओं के क्षेत्र में प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को प्रदान किया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है। हेमा नेगी करासी को यह पुरस्कार मिलना उनके कलात्मक योगदान के साथ उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंगीत विधाओं के महत्व को भी रेखांकित करता है।
मांगल गीतों और लोकजागर को नई पहचान
उत्तराखंड के मांगल गीत विवाह समारोहों तक सीमित संगीत विधा नहीं हैं, बल्कि सामाजिक परंपराओं, पारिवारिक संस्कारों और सामूहिक सांस्कृतिक स्मृतियों का अभिन्न हिस्सा हैं। इसी तरह लोकजागर प्रदेश की लोकआस्था और पारंपरिक संगीत की विशिष्ट पहचान है।
हेमा नेगी करासी इन लोकविधाओं को मंचीय प्रस्तुतियों और आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। उनकी प्रस्तुतियां उत्तराखंड की लोकभाषा, लोकधुनों और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति नई पीढ़ी में रुचि जगाने का माध्यम बन रही हैं।
उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण
हेमा नेगी करासी को मिले इस सम्मान से प्रदेश के लोककलाकारों, संस्कृति प्रेमियों और उनके प्रशंसकों में हर्ष का माहौल है। उनकी उपलब्धि उन कलाकारों के लिए प्रेरणा है, जो अपनी लोकभाषा, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
यह सम्मान इस बात को भी रेखांकित करता है कि स्थानीय लोककलाओं में निहित सांस्कृतिक समृद्धि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकती है। हेमा नेगी करासी की यह उपलब्धि केवल एक कलाकार का सम्मान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकपरंपराओं और पहाड़ की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
रिपोर्ट: प्रदीप चौहान
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