मसूरी: उत्तराखंड फिल्म उद्योग पर मंडरा रहा संकट, उफतारा ने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की

मसूरी। उत्तराखंड फिल्म उद्योग पर मंडराते संकट को लेकर उत्तराखंड फिल्म टेलीविजन एवं रेडियो एसोसिएशन (उफतारा) ने सरकार से जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

फिल्म बोर्ड गठन और पुरस्कार जारी करने की मांग

लाइब्रेरी स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में उफतारा के नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रदीप भंडारी ने कहा कि—

  • राज्य में फिल्म बोर्ड का गठन वर्षों से लंबित है

  • फिल्म पुरस्कारों के लिए निर्धारित राशि का लाभ कलाकारों को नहीं मिल रहा

  • क्षेत्रीय फिल्म विकास परिषद द्वारा अनुदान में कटौती कर निर्माताओं का शोषण किया जा रहा है

उन्होंने मांग की कि इन सभी विसंगतियों को तुरंत दूर किया जाए।

“बंदी के कगार पर पहुंच चुका है फिल्म उद्योग”

प्रदीप भंडारी ने कहा कि गलत नीतियों के कारण उत्तराखंड का क्षेत्रीय फिल्म उद्योग बंदी की स्थिति में पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में फिल्म बोर्ड का गठन हुआ था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह व्यवस्था फिर बंद हो गई।

उन्होंने यह भी कहा कि—

  • स्थानीय फिल्मों को सिनेमा हॉल नहीं मिलते

  • शूटिंग के दौरान सुरक्षा सुविधाओं का अभाव है

  • कलाकारों को अपेक्षित समर्थन नहीं दिया जा रहा

नीति बनी, लेकिन जमीनी लाभ नहीं

महासचिव कांता प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार ने फिल्म नीति तो बनाई है, लेकिन उसका लाभ जमीनी स्तर पर नहीं पहुंच रहा।

उन्होंने सुझाव दिया कि—

  • हरियाणा और बिहार की तर्ज पर नीति लागू की जाए

  • फिल्म बोर्ड में एक सरकारी अधिकारी और एक उद्योग से जुड़े व्यक्ति को उपाध्यक्ष बनाया जाए

लोक कलाकारों की स्थिति पर भी चिंता

उफतारा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अमरदेव गोदियाल ने लोक कलाकारों की स्थिति पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि—

  • कलाकारों को बेहद कम मानदेय मिल रहा है

  • समय पर भुगतान नहीं होता

  • कई बुजुर्ग कलाकारों की पेंशन लंबित है

सांस्कृतिक पहचान बचाने में फिल्म उद्योग की भूमिका

वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड का फिल्म उद्योग—

  • रोजगार का बड़ा माध्यम है

  • राज्य की बोली, भाषा और संस्कृति को संरक्षित करता है

उन्होंने सरकार से अपील की कि स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन और उचित सुविधाएं दी जाएं।

ये रहे मौजूद पदाधिकारी

प्रेसवार्ता में—

  • अध्यक्ष प्रदीप भंडारी

  • महासचिव कांता प्रसाद

  • वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अमरदेव गोदियाल

  • प्रचार सचिव नागेंद्र प्रसाद

  • कोषाध्यक्ष प्रमोद बेलवाल

  • सहसचिव नंदन सिंह कंडारी

  • सलाहकार संयोजक जस पंवार (जस्सी)

  • कमलेश भंडारी

सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

निष्कर्ष

उफतारा की यह मांग न केवल फिल्म उद्योग के भविष्य से जुड़ी है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय कलाकारों के हितों से भी सीधे तौर पर संबंधित है।


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