देश की राजधानी दिल्ली में उत्तराखंड के तीज-त्योहार और संस्कृति संवर्धन हेतु गढ़वाली कुमाऊनी जौनसारी भाषा अकादमी, दिल्ली सरकार के पूर्व सदस्य पृथ्वी रावत (पूर्व आरडब्ल्यूए प्रधान) और उत्तराखंड आदर्श समिति के सांस्कृतिक सचिव पूजा भट्ट और संगीता गोस्वामी निरंतर प्रयासरत हैं।
उत्तराखंड राज्य के गांवों में पलायन से विलुप्त होती इस संस्कृति को दिल्ली के द्वारका में पिछले डेढ़ दशक से देवी स्वरूपा नन्हीं-नन्हीं बच्चों द्वारा फ्यूलड़ी (पीले फूल) लोगों की दहलीज पर 15 मार्च से बिखोत यानी 14 अप्रैल (बैसाखी) तक डालना और सभी के सुख-संपन्नता हेतु प्रार्थना करना, और सबको फुलदेही एवं बैसाखी (सनातनी नव वर्ष) की बधाई देना शामिल है।
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