पोखरी (चमोली)। मां चंडिका भवानी पोखरी चमेठी से जुड़ी प्राचीन धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं की झलक टिहरी गढ़वाल राजदरबार में देखने को मिली। अष्टमी पूजन के अवसर पर मां चंडिका भवानी चमेठी के एरवालों ने गढ़वाल राजवंश के पारंपरिक राजचिह्नों और ध्वजा के साथ नृत्य कर ऐतिहासिक विरासत का प्रदर्शन किया। इस दौरान राजदरबार में एरवालों का राजतिलक और पगड़ी रस्म पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई।
धार्मिक आस्था और राजपरंपराओं का अनूठा संगम
आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ गढ़वाल की ऐतिहासिक राजपरंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। राजचिह्नों और ध्वजा के साथ एरवालों का पारंपरिक नृत्य समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। इस रस्म के माध्यम से मां चंडिका भवानी से जुड़ी परंपराओं और गढ़वाल राजवंश के साथ उनके ऐतिहासिक संबंधों की झलक सामने आई।
राजपरिवार के सदस्यों से मिले ब्रह्म गुरु राजकुंवर
इस अवसर पर ब्रह्म गुरु राजकुंवर कुंवर दीपक सिंह ने राजपरिवार के सदस्यों से भेंट की। इस मुलाकात ने पारिवारिक संबंधों के साथ परंपराओं के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के महत्व को भी रेखांकित किया।
लोकसंस्कृति और ऐतिहासिक विरासत की पहचान
मां चंडिका भवानी की आराधना पोखरी क्षेत्र की धार्मिक आस्था का अभिन्न हिस्सा है। देवी से जुड़ी परंपराएं क्षेत्र की लोकसंस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती हैं।
ऐसे आयोजन न केवल प्राचीन रीति-रिवाजों को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और गौरवशाली विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बनते हैं।
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