गौचर (चमोली)। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) की 8वीं वाहिनी ने शनिवार को गौचर स्थित वाहिनी परिसर में अपना 65वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। सेनानी मनोहर सिंह रावत के नेतृत्व में आयोजित समारोह में हिमवीरों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के संकल्प को नमन किया गया। इस अवसर पर सेनानी ने परेड की सलामी ली और अधिकारियों, जवानों तथा उनके परिजनों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।
विषम परिस्थितियों में देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटे हिमवीर
समारोह को संबोधित करते हुए सेनानी मनोहर सिंह रावत ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल का गठन वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा और निगरानी के उद्देश्य से किया गया था। छह दशकों से अधिक समय में बल ने अपनी वीरता, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता से देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन मौसम के बावजूद हिमवीर सीमाओं की सुरक्षा के लिए दिन-रात मुस्तैदी से तैनात रहते हैं।
आंतरिक सुरक्षा और चारधाम यात्रा में भी अहम भूमिका
सेनानी ने कहा कि आईटीबीपी के जवान सीमा सुरक्षा के साथ आंतरिक सुरक्षा, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों तथा धार्मिक और पर्यटन स्थलों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए वाहिनी पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रही है।
सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए प्रतिबद्ध वाहिनी
सेनानी मनोहर सिंह रावत ने कहा कि वाहिनी अपने जिम्मेदारी वाले क्षेत्रों में सीमावर्ती गांवों और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी प्रतिबद्ध है। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) के तहत विभिन्न परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सीमांत क्षेत्रों के विकास के साथ स्थानीय लोगों को भी लाभ मिल सके।
अधिकारियों और जवानों ने साझा की स्थापना दिवस की खुशियां
समारोह में परेड के बाद अधिकारियों और जवानों ने स्थापना दिवस की खुशियां साझा कीं। इस अवसर पर उप सेनानी यायाति कुमार बेहरा, द्वितीय कमान (वेट) डॉ. गौतम कुमार पंकज सहित वाहिनी के अधिकारी और जवान मौजूद रहे।
समारोह ने जवानों में राष्ट्रसेवा, अनुशासन और देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत किया।
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