देहरादून डीएम सविन बंसल का ‘संडे भी वर्किंग’: जनदर्शन में छूटे 100 फरियादियों को दोबारा बुलाकर सुनी समस्याएँ

देहरादून: सकीय आपात बैठक के कारण सोमवार को जनदर्शन में अपनी शिकायतें दर्ज न करा सके लगभग 100 फरियादियों को जिलाधिकारी सविन बंसल ने पुनः आमंत्रित कर विशेष ‘जनदरबार’ लगाया और उनकी समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया।

जनदर्शन में 100 से अधिक मामलों की त्वरित सुनवाई

जिलाधिकारी ने अपने कार्यालय में आयोजित इस जनदर्शन में विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों की गंभीर शिकायतें सुनीं। प्रतिदिन की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुँचे, जिनमें अन्य जनपदों से आए फरियादी भी शामिल थे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यस्तता के बावजूद जनता की समस्याओं का समाधान उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

जरूरतमंदों को मौके पर मिली बड़ी राहत

जनदर्शन के दौरान जिलाधिकारी ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कई मामलों में तत्काल सहायता के निर्देश जारी किए:

  • उज्ज्वला योजना: संगतियावाला निवासी दीपा को तत्काल गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

  • शिक्षा सहायता: राखी और बीना की बेटियों की पढ़ाई “नंदा-सुनंदा” प्रोजेक्ट के माध्यम से पुनः प्रारंभ कराने का आदेश दिया।

  • डिजिटल मदद: मेधावी छात्रा प्राची सिंह को ‘राइफल फंड’ से लैपटॉप उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

  • आर्थिक संबल: दिव्यांग मनीष शर्मा को ₹25,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

बुजुर्ग की अपील पर दिव्यांग बालिका को मिला सहारा

उत्तरकाशी निवासी मंजरी देवी की भावुक अपील पर जिलाधिकारी ने उनकी दिव्यांग पौत्री को विशेष देखभाल संस्थान “राफेल होम” में प्रवेश दिलाने के निर्देश दिए, ताकि उसे उचित संरक्षण और चिकित्सा मिल सके।

महिला प्रताड़ना मामलों में तत्काल FIR

जनदर्शन में महिलाओं और बुजुर्गों के उत्पीड़न से जुड़े मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया गया। साक्ष्यों के आधार पर जिलाधिकारी ने तत्काल तीन मामलों में ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज करने के आदेश दिए।

नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही

जिलाधिकारी सविन बंसल ने बताया कि वे प्रतिदिन कार्यालय में आने वाले प्रत्येक फरियादी की बात सुनते हैं। केवल निर्देश ही नहीं, बल्कि उन समाधानों की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाती है ताकि धरातल पर परिणाम दिखें।

📌 निष्कर्ष

देहरादून का ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम न केवल समस्याओं के त्वरित समाधान का माध्यम बना है, बल्कि यह संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की एक नई मिसाल भी पेश कर रहा है।

रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो


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