राज्य आपदा मोचन निधि की बैठक: भूस्खलन, बाढ़ सुरक्षा और ड्रेनेज कार्यों को मंजूरी

देहरादून: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में आयोजित राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में राज्य आपदा मोचन निधि (एसडीआरएफ) एवं आपदा न्यूनीकरण निधि के अंतर्गत विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक में जनपदों से प्राप्त आपदा प्रबंधन एवं सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई।

प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पर सख्ती

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि:

  • सभी प्रस्ताव जनपद स्तरीय समिति की सिफारिश के बाद ही भेजे जाएं

  • प्रस्तावों को जिलाधिकारी के माध्यम से ही प्रस्तुत किया जाए

नदियों के प्रबंधन और बाढ़ सुरक्षा पर फोकस

मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग को निर्देशित किया कि:

  • नदियों की ड्रेजिंग/माइनिंग के लिए एसओपी जल्द जारी की जाए

  • बाढ़ सुरक्षा कार्यों को तकनीकी स्वीकृति (टीएसी) के बाद ही प्रस्तुत किया जाए

  • जिन नदियों में हर साल कटान होता है, वहां चैनलाइजेशन प्लान तैयार किया जाए

👉 सितारगंज की बैगुल नदी के लिए विशेष अध्ययन कराने के निर्देश भी दिए गए

इन प्रमुख परियोजनाओं को मिली मंजूरी

बैठक में कई जनपदों की आपदा सुरक्षा परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई, जिनमें शामिल हैं:

🏔️ भूस्खलन और ड्रेनेज कार्य

  • नैनीताल: चार्टन लॉज सुरक्षा कार्य – ₹ 699.98 लाख

  • पिथौरागढ़: धारचूला क्षेत्र में ड्रेनेज एवं भूस्खलन कार्य – ₹ 3840.78 लाख

  • हरिद्वार: मनसा देवी बाईपास रोड ड्रेनेज कार्य – ₹ 4124.83 लाख

🌊 बाढ़ सुरक्षा कार्य

  • सितारगंज (बैगुल नदी): विभिन्न गांवों की सुरक्षा योजनाएं

  • जसपुर: फीका नदी से गांव हजीरों की सुरक्षा – ₹ 419.82 लाख

  • रायपुर (देहरादून): जोगीवाला व बद्रीपुर में बाढ़ सुरक्षा – ₹ 460.45 लाख

🛣️ सड़क और संरचनात्मक सुरक्षा

  • अल्मोड़ा: दुधौली मार्ग सुरक्षा कार्य

  • उत्तरकाशी: धराली झूला पुल और हर्षिल-मुखवा मार्ग सुरक्षा कार्य

  • देहरादून: टोंस नदी तट पर सुरक्षा दीवार निर्माण

₹34 करोड़ के प्रस्तावों को कार्योत्तर मंजूरी

राज्य आपदा मोचन निधि के अंतर्गत विभिन्न मदों में ₹34 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियों को कार्योत्तर अनुमोदन प्रदान किया गया।

बैठक में मौजूद रहे वरिष्ठ अधिकारी

बैठक में सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय, विनोद कुमार सुमन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो


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