देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने एलपीजी गैस की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। अवैध गैस संग्रहण, कालाबाजारी या घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की स्थिति में दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्ट्रेट स्थित ऋषिपर्णा सभागार में आयोजित बैठक में ऑयल कंपनियों के प्रतिनिधियों और गैस एजेंसी संचालकों के साथ एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की गई।
मुख्य निर्देश
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अवैध गैस संग्रहण, कालाबाजारी और अवैध रिफिलिंग पाए जाने पर गैस एजेंसियां सील की जाएंगी
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दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और BNS के तहत कार्रवाई
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गैस एजेंसियों में ओटीपी आधारित होम डिलीवरी सिस्टम लागू करने के निर्देश
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एक बार गैस बुकिंग के बाद 25 दिन का लॉक-इन पीरियड रहेगा
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घरेलू गैस का व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर सिलेंडर जब्त किए जाएंगे
गैस शिकायतों के लिए कंट्रोल रूम स्थापित
एलपीजी गैस से जुड़ी शिकायतों और समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने आपदा कंट्रोल रूम में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है।
नागरिक इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
☎ 1077
☎ 0135-2626066
☎ 0135-2726066
📱 व्हाट्सएप: 7534826066
रोज होगी गैस वितरण की निगरानी
जिला पूर्ति अधिकारी और तेल कंपनियों के प्रतिनिधि प्रतिदिन 1 घंटे की बैठक कर गैस वितरण, स्टॉक बैकलॉग और प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करेंगे।
जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में पुलिस और पूर्ति निरीक्षकों के साथ गैस एजेंसियों की छापेमारी करें।
72 गैस एजेंसियां प्रशासन की निगरानी में
देहरादून जिले में वर्तमान में 72 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिनके माध्यम से:
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लगभग 7.81 लाख घरेलू उपभोक्ताओं
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19,624 व्यवसायिक उपभोक्ताओं
को गैस आपूर्ति की जाती है।
डीएम की जनता से अपील
जिलाधिकारी सविन बंसल ने नागरिकों से अपील की है कि गैस को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। जिले में एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराएं।
मीटिंग में उपस्थित अधिकारी:
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा, नगर मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी के.के. अग्रवाल सहित ऑयल कंपनियों और गैस एजेंसी एसोसिएशन के प्रतिनिधि।
रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो
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