जनपद पौड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में अब केवल मकान नहीं बन रहे, बल्कि लोगों की उम्मीदें भी साकार हो रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) ने उन परिवारों के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास का संचार किया है, जिनके लिए कभी पक्की छत महज एक सपना हुआ करती थी। आज यह सपना हकीकत बनकर गांव-गांव खुशियां बिखेर रहा है, जहां पात्र लाभार्थियों को 1 लाख 30 हजार रुपये की सहायता राशि तीन किश्तों में सीधे उनके खातों में प्राप्त हो रही है।
12,379 नए आवासों के लिए सर्वे पूरा
जनपद पौड़ी में वर्ष 2016 से 2024 के बीच 4,594 पात्र परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल चुके हैं। वहीं आवास प्लस सर्वे-2024 के तहत सभी विकासखंडों में 12,379 नए आवासों के लिए सर्वे पूरा कर लिया गया है।
तीन चरणों में किया जाता सर्वे
यह सर्वे तीन चरणों में किया जाता है और इसकी वैधता पांच वर्षों तक रहती है, ताकि वास्तविक जरूरतमंद ही योजना से जुड़ें। अब जिला स्तरीय समिति द्वारा पात्र लोगों को चिह्नित कर आगे की प्रक्रिया तेज की जा रही है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता है सीधा और पारदर्शी लाभ।
सीधे खाते में आती है सहायता राशि
पात्र लाभार्थियों को 1 लाख 30 हजार रुपये की सहायता राशि तीन किश्तों में सीधे खाते में मिलती है। इसके साथ 95 दिन की विकसित भारत-जी राम जी मजदूरी और उत्तराखंड सरकार द्वारा किचन सामग्री व बर्तनों के लिए छह हजार रुपये की अतिरिक्त मदद भी दी जा रही है।
- इस योजना से पात्र लाभार्थियों को एक कमरा, एक किचन और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं वाला घर मिल रहा है।
मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी गिरीश गुणवंत का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना सिर्फ मकान बनाने की योजना नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के जीवन को मजबूत आधार देने की पहल है।
- उन्होंने कहा योजना की पारदर्शी प्रक्रिया और समयबद्ध क्रियान्वयन के कारण जनपद हर वर्ष अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर रहा है।
2023-24 में 1145 परिवारों को मिला घर
योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 215 का लक्ष्य पूरा, 2017-18 में 184 का लक्ष्य हासिल, 2020-21 में 860 का लक्ष्य पूर्ण, 2021-22 में 147 का लक्ष्य प्राप्त, 2022-23 में 2049 के सापेक्ष 2043 आवास, 2023-24 में 1146 के सापेक्ष 1145 परिवारों को घर मिला है।
- प्रधानमंत्री आवास योजना ने जनपद के गांवों में बदलाव की नींव रख दी है। आज पक्की दीवारों के साथ-साथ लोगों के सपने भी मजबूत हुए हैं।
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