देहरादून: देहरादून जिले के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ी पहल की है। 168 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में 884 स्मार्ट टीवी लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे अब हर कक्षा में स्मार्ट तकनीक के जरिए पढ़ाई होगी।
‘प्रोजेक्ट उत्कर्ष’ के तहत डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल पर “प्रोजेक्ट उत्कर्ष” के अंतर्गत यह योजना लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा उपलब्ध कराना है।
इस परियोजना पर लगभग 3.67 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसकी धनराशि जिला खनन न्यास (डीएमएफ) से उपलब्ध कराई गई है।
सभी स्कूलों में पहुंच चुके स्मार्ट टीवी
जिला प्रशासन के अनुसार सभी 168 विद्यालयों में स्मार्ट टीवी की आपूर्ति पूरी हो चुकी है और इंस्टॉलेशन का कार्य तेजी से चल रहा है।
विद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार 43 इंच और 55 इंच के स्मार्ट टीवी लगाए जा रहे हैं।
पढ़ाई होगी और ज्यादा स्मार्ट
इन स्मार्ट टीवी के माध्यम से अब कक्षाओं में:
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ऑडियो-वीडियो कंटेंट
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ई-लर्निंग मॉड्यूल
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डिजिटल पाठ्य सामग्री
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वर्चुअल क्लासेस
का उपयोग किया जाएगा। विद्यार्थियों को दीक्षा पोर्टल, पीएम ई-विद्या और शैक्षिक वीडियो जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी समझ और सीखने की गुणवत्ता में सुधार होगा।
सरकारी और निजी स्कूलों के बीच अंतर होगा कम
जिलाधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच डिजिटल अंतर को कम करना है। इससे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक शिक्षण सुविधाएं मिल सकेंगी।
पहले भी स्कूलों को मिला फर्नीचर
जिला प्रशासन द्वारा इससे पहले 5 करोड़ रुपये के सीएसआर फंड से जिले के सभी सरकारी विद्यालयों को फर्नीचर युक्त किया जा चुका है, जिससे स्कूलों की आधारभूत सुविधाएं बेहतर हुई हैं।
पारदर्शी प्रक्रिया से हुई खरीद
स्मार्ट टीवी की खरीद जीईएम पोर्टल के माध्यम से ई-टेंडर प्रक्रिया द्वारा की गई। इस प्रक्रिया में 12 फर्मों ने भाग लिया और तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन के बाद चयन किया गया।
शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि यह पहल शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि जल्द ही सभी विद्यालयों में डिजिटल शिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो
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