चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। इसी भीड़ और आस्था का फायदा उठाकर साइबर ठग सक्रिय हो जाते हैं और लोगों को धोखाधड़ी का शिकार बनाते हैं।
ठगी का तरीका (मोडस ऑपरेंडी):
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असली जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट तैयार की जाती हैं
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गूगल सर्च और सोशल मीडिया एड्स के जरिए इन्हें प्रमोट किया जाता है
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फर्जी एजेंट बनकर व्हाट्सएप/कॉल के माध्यम से संपर्क किया जाता है
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श्रद्धालुओं से आधार व यात्रा संबंधी जानकारी ली जाती है
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इसके बाद यूपीआई आईडी या फर्जी बैंक खातों में भुगतान कराया जाता है
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भुगतान के बाद न टिकट मिलता है, न कोई जवाब
ऐसे पहचानें फर्जीवाड़ा:
🔸 बहुत सस्ते ऑफर या तत्काल कन्फर्म बुकिंग का झांसा
🔸 संदिग्ध लिंक या बिना आधिकारिक डोमेन वाली वेबसाइट
🔸 केवल व्हाट्सएप/मोबाइल नंबर पर आधारित एजेंट
🔸 पेमेंट के लिए बार-बार दबाव बनाना
सुरक्षित यात्रा के लिए जरूरी सावधानियां:
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केवल ऑफिशियल/ऑथोराइज्ड वेबसाइट या पोर्टल से ही बुकिंग करें
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गूगल एड्स या सोशल मीडिया लिंक पर बिना जांच भरोसा न करें
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किसी भी एजेंट की पहचान व वैधता की पुष्टि अवश्य करें
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आधार/ओटीपी/बैंक डिटेल्स किसी से साझा न करें
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प्राइवेट यूपीआई आईडी या अज्ञात खातों में भुगतान न करें
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पेमेंट से पहले वेबसाइट यूआरएल, रिव्यूज और कॉन्टैक्ट डिटेल्स अवश्य जांचें
चमोली पुलिस की अपील:
आपकी सतर्कता ही आपकी सुरक्षा है। थोड़ी सी लापरवाही आपकी यात्रा को प्रभावित कर सकती है।
संदिग्ध कॉल, लिंक या साइबर ठगी की सूचना तुरंत दें:
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निकटतम पुलिस थाना
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साइबर हेल्पलाइन 1930
सुरक्षित रहें, सतर्क रहें और अपनी चारधाम यात्रा को सुखद बनाएं।
रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो
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