कर्णप्रयाग। वर्षों से सड़क सुविधा की राह देख रहे सकंड गांव में सड़क का मुद्दा अब महज आवागमन तक सीमित नहीं रह गया है। यह गांव की शिक्षा, रोजगार, कृषि और पलायन जैसे सवालों से भी जुड़ गया है। लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों ने जब सरकारी कार्रवाई का इंतजार करते हुए स्वयं श्रमदान से सड़क कटिंग का काम शुरू किया, तो करीब चार दिन तक काम चलता रहा। इसके बाद डीएफओ, एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता गांव पहुंचे और तीन माह के भीतर सड़क निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों के भरोसे के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल श्रमदान से चल रहा काम रोक दिया है।
वर्षों से सड़क सुविधा से वंचित है गांव
सड़क के अभाव में सकंड गांव के ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों से यातायात सुविधा नहीं होने का असर गांव की शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। गांव में संचालित प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुका है और वर्तमान में विद्यालय भवन का उपयोग केवल मतदान केंद्र के रूप में किया जा रहा है।
विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है। छोटे बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय करनी पड़ने से अभिभावकों की चिंता बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे गांव से पलायन का संकट भी गहराता जा रहा है।
चार दिन श्रमदान से ग्रामीणों ने शुरू की सड़क कटिंग
सरकारी स्तर पर लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार करने के बाद ग्रामीणों ने स्वयं सड़क निर्माण की दिशा में पहल करने का निर्णय लिया। इसी क्रम में करीब चार दिनों तक ग्रामीणों ने श्रमदान कर सड़क कटिंग का काम किया।
ग्रामीणों का कहना था कि वर्षों से सड़क की मांग के बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्हें खुद ही गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए प्रयास करना पड़ रहा है। श्रमदान से सड़क कटिंग शुरू होने की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचने के बाद प्रशासन और विभागीय अधिकारी गांव पहुंचे।
डीएफओ, एसडीएम और लोनिवि के ईई ने दिया लिखित आश्वासन
ग्रामीणों के श्रमदान की जानकारी के बाद डीएफओ, एसडीएम और लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सकंड गांव पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याओं और उनकी मांगों पर चर्चा की।
अधिकारियों की ओर से तीन माह के भीतर सड़क निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई किए जाने का लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल सड़क कटिंग का काम रोक दिया।
आश्वासन के बाद भी धरातल पर कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि पहली बार जिम्मेदार अधिकारी स्वयं गांव पहुंचे हैं और उन्होंने समयसीमा के साथ लिखित भरोसा दिया है। ऐसे में प्रशासन को एक और मौका देना उचित समझा गया है।
हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि अब उनकी नजर केवल आश्वासन पर नहीं, बल्कि धरातल पर होने वाली कार्रवाई पर रहेगी। उनका कहना है कि तीन माह के भीतर सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए, ताकि वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सके।
सड़क नहीं होने से शिक्षा और खेती प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार सड़क सुविधा नहीं होने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। प्राथमिक विद्यालय बंद होने के बाद बच्चों को दूसरे गांवों या आसपास के क्षेत्रों में जाना पड़ता है। वहीं, कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए चुनौतीपूर्ण है।
सड़क के अभाव में खेती-किसानी से जुड़े उत्पादों को मुख्य मार्ग तक पैदल या अन्य साधनों से ढोकर ले जाना पड़ता है। इससे समय और मेहनत दोनों अधिक लगते हैं। इसके अलावा बीमार, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को अस्पताल तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचाने में भी परेशानी होती है।
सड़क के मुद्दे पर राजनीतिक श्रेय की चर्चा
प्रशासनिक पहल के बाद सकंड गांव की सड़क को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज हुई है। अलग-अलग राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों की ओर से सड़क की मांग को लेकर किए गए प्रयासों को सामने रखा जा रहा है और इसे ग्रामीणों की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के प्रयासों से जोड़ा जा रहा है।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए सड़क किसी राजनीतिक दल की उपलब्धि का विषय नहीं, बल्कि गांव की बुनियादी जरूरत है। उनका कहना है कि सड़क के लिए जिसने भी प्रयास किया, उसका स्वागत है, लेकिन अब प्राथमिकता सड़क निर्माण की प्रक्रिया को धरातल पर आगे बढ़ाना है।
तीन माह की समयसीमा पर टिकी ग्रामीणों की निगाहें
लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल श्रमदान से चल रहा काम रोक दिया है। अब तीन माह की समयसीमा उनके लिए उम्मीद और इंतजार दोनों का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से आश्वासनों का इंतजार करते आए हैं, लेकिन इस बार अधिकारियों के गांव पहुंचने और लिखित भरोसा देने से उन्हें ठोस कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि विभागीय प्रक्रिया, आवश्यक स्वीकृतियां और अन्य औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। उनका कहना है कि सड़क बनने से आवागमन सुगम होने के साथ ही बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय को दोबारा संचालित करने, बच्चों की शिक्षा व्यवस्था सुधारने तथा रोजगार और कृषि गतिविधियों को गति देने की राह खुलेगी।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे तीन माह तक प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करेंगे। यदि निर्धारित अवधि के बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हुई तो वे अपनी मांग को लेकर फिर से आवाज उठाने के लिए मजबूर होंगे।
