लोक जनशक्ति पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस: पलायन, घोस्ट विलेज और बेरोजगारी पर चिंता जताई

देहरादून: देहरादून के बीजापुर गेस्ट हाउस में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को पार्टी के नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह ठाकुर और दिल्ली से आए प्रदेश प्रभारी पवन वर्मा ने संबोधित किया।

पलायन और घोस्ट विलेज पर गंभीर चिंता

प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से हो रहे पलायन, बेरोजगारी और रोजगार के अवसरों की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते घोस्ट विलेज राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पलायन रोकने के लिए सरकार को:

  • स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना होगा

  • पर्यटन आधारित रोजगार विकसित करना होगा

  • कृषि और जड़ी-बूटी आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करना होगा

  • शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत करनी होगी

रिवर्स माइग्रेशन और स्टार्टअप पर जोर

पार्टी नेताओं ने कहा कि रिवर्स माइग्रेशन नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत है। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में स्टार्ट-अप, होमस्टे और पर्यटन विकास को विशेष प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सके।

चारधाम यात्रा और भूमि कानून पर भी उठे मुद्दे

प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगामी चारधाम यात्रा 2026 को लेकर यात्रा मार्गों की बेहतर व्यवस्था, स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ने और छोटे व्यापारियों को अवसर देने की बात कही गई।

इसके साथ ही राज्य में सशक्त भूमि कानून और संतुलित विकास नीति लागू करने पर भी जोर दिया गया, ताकि प्रदेश की मूल पहचान और संसाधनों की रक्षा हो सके।

पार्टी की कोर कमेटी की घोषणा

प्रदेश अध्यक्ष विशाल सिंह ठाकुर ने इस अवसर पर पार्टी की कोर कमेटी की घोषणा भी की और प्रदेश व जिला स्तर पर जिम्मेदारियां सौंपीं।

उन्होंने कहा कि पार्टी जन-जन तक पहुंचकर समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करेगी और धर्म या क्षेत्रवाद की राजनीति से दूर रहकर केवल विकास और रोजगार पर ध्यान देगी।

कई कार्यकर्ता रहे मौजूद

इस अवसर पर शहीद कादरी, शिवांश चौधरी, मोनिका अष्टवाल, दिलीप प्रधान, जॉय अर्नाल्ड, के.पी. सिंह, गौतम कुमार, राजेश पंवार, विजय ध्यानी, सुरेंद्र चौहान सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: पहाड़ी चीता ब्यूरो


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